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Thursday, 23 June 2011

सुरक्षा से समझौता,1000 करोड़ का घोटाला

नई दिल्ली। पहले से ही घोटाले में घिरी यूपीए सरकार के शासन में अब एक और नया घोटाला सामना आया है। एक निजी चैनल ने सीएजी की रिपोर्ट के हवाले से नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (एनटीआरओ)में एक हजार करोड़ रूपए के घोटाले की बात कही है।
गौर करने वाली बात यह है कि एनटीआरओ सीधा प्रधानमंत्री कार्यालय के अंतर्गत आता है। सूत्रों के मुताबिक एनटीआरओ ने यूएवी खरीद, कर्मचारियों की नियुक्ति समेत कई मामलों में मनमानी की। एनटीआरओ की ओर से यूएवी की खरीद में ही करीब 450 करोड़ रूपए का घपला हुआ है। बताया जा रहा है कि एनटीआरओ ने जो यूएवी खरीदे थे वे काम के ही नहीं निकले जबकि 150 कर्मचारियो की नियुक्ति भी बिना किसी कमेटी की मंजूरी के कर दी गई।
एनटीआरओ की ऑडिट का अधिकार किसी को नहीं है। जब प्रधानमंत्री ने पहली बार इस संस्थान की ऑडिट करवाई तो यह घोटाला सामने आया। एनटीआरओ को सरकार से अब तक 8000 करोड़ रूपए मिले हैं लेकिन इसका कोई हिसाब किताब नहीं है। गौरतलब है कि पूर्व सीवीसी को इस संस्थान में हो रहे फर्जीवाड़े के संबंध में कुछ शिकायतें मिली थी। उन्होंने इस संबंध में जवाब भी मांगा था लेकिन तब उन्हें संतोषजनकर जवाब नहीं मिला।
करगिल युद्ध के बाद बना था एनटीआरओ

एनटीआरओ की स्थापना खुफिया एजेंसियों की मदद के लिए 2004 में की गई थी। जिस समय इसकी स्थापना हुई उस समय इसमें मात्र एक सदस्य ही थे। एनटीआरओ खुफिया एजेंसियों को तकनीकी मदद उपलब्ध कराता है। एनटीआरओ की स्थापना की जरूरत करगिल युद्ध के महसूस की गई थी। करगिल युद्ध के एक रिपोर्ट में कहा गया था कि खुफिया एजेंसियों की नाकामी के कारण पाकिस्तानी की ओर से घुसैपठ हुई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि खुफिया एजेंसियां आधुनिक उपकरणों से सुसçज्जत नहीं है इसलिए इसकी मदद के लिए एक स्वतंत्र संगठन की जरूरत है, तब तत्कालीन सरकार ने एनटीआरओ की स्थापना की।

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