नई दिल्ली. लोकपाल बिल को लेकर ड्राफ्टिंग कमिटी की आखिरी बैठक मंगलवार को मतभेदों के बीच खत्म हो गई। इस बैठक में नागरिक समाज (सिविल सोसाइटी) की तरफ से शामिल प्रशांत भूषण ने सरकार के रुख को लेकर गहरी निराशा जाहिर की है। उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से पेश लोकपाल बिल के मसौदे के मुताबिक लोकपाल को गठित करने वाली चुनाव समिति में सरकार के प्रतिनिधियों का दबदबा रहेगा।
सिविल सोसाइटी की तरफ से ड्राफ्टिंग कमिटी में शामिल अरविंद केजरीवाल ने बैठक के बाद कहा कि छह मुद्दों पर अब भी उनके और सरकार के बीच मतभेद कायम है। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमने सरकार अपना ड्राफ्ट सौंप दिया है और सरकार की तरफ से ड्राफ्टिंग कमिटी में शामिल मंत्रियों ने हमें अपना ड्राफ्ट सौंप दिया है।
केजरीवाल ने कहा, ‘सरकार की तरफ से पेश लोकपाल बिल के मसौदे में प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे से बाहर रखा गया है। इसके अलावा सरकार की तरफ से पेश ड्राफ्ट में कहा गया है कि लोकपाल की चयन समिति में पांच सत्ताधारी पक्ष के होंगे और सात राजनीतिक नुमाइंदे होंगे। लोकपाल को हटाने का भी अधिकार सरकार के पास रहेगा। जबकि सीबीआई सरकार के नियंत्रण में रहेगी। प्रधानमंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच सीबीआई के पास रहेगी। सांसद भी लोकपाल के दायरे से बाहर रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जज लोकपाल के दायरे से बाहर रहेंगे। निचली अदालत भी लोकपाल के दायरे से बाहर रहेगी।’
केजरीवाल ने लोकपाल द्वारा की जाने वाली जांच और मुकदमे को लेकर भी सरकार की तरफ से पेश ड्राफ्ट की आलोचना की। उन्होंने कहा, ‘सरकार चाहती है कि लोकपाल किसी भी मामले में रिपोर्ट दर्ज करने से पहले आरोपी का पक्ष सुने। इसके अलावा मुकदमा दायर करने से पहले भी लोकपाल आरोपी का पक्ष एक बार फिर सुने।’
केजरीवाल ने कहा कि अगर सरकार की तरफ से पेश ड्राफ्ट को पास किया जाता है तो लोकपाल के पास जल्द ही इतना काम आ जाएगा कि यह संस्था काम के बोझ से दब जाएगी।केजरीवाल ने कहा कि हम चाहते हैं कि केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त को एक ही कानून के तहत नियुक्त किया जाए। लेकिन सरकार चाहती है कि मौजूदा सिस्टम के ही तहत लोकायुक्त काम करें।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ड्राफ्टिंग कमिटी में होने वाली बातचीत का ऑडियो टेप मांगने पर ड्राफ्टिंग कमिटी में शामिल केंद्र के मंत्रियों ने इस मांग पर विचार करने को कहा है।
दूसरी तरफ, केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने बैठक खत्म होने के बाद कहा कि सिविल सोसाइटी और सरकार की तरफ से पेश ड्राफ्ट राजनीतिक दलों को भेजे जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘पार्टियों की तरफ से जो भी सुझाव आएगा, उसे कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। जिस भी ड्राफ्ट या दोनों ड्राफ्टों में जिन भी बिंदुओं पर सहमति बनेगी उसे संसद के मॉनसून सत्र में रखा जाएगा।’
सिविल सोसाइटी की तरफ से ड्राफ्टिंग कमिटी में शामिल अरविंद केजरीवाल ने बैठक के बाद कहा कि छह मुद्दों पर अब भी उनके और सरकार के बीच मतभेद कायम है। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमने सरकार अपना ड्राफ्ट सौंप दिया है और सरकार की तरफ से ड्राफ्टिंग कमिटी में शामिल मंत्रियों ने हमें अपना ड्राफ्ट सौंप दिया है।
केजरीवाल ने कहा, ‘सरकार की तरफ से पेश लोकपाल बिल के मसौदे में प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे से बाहर रखा गया है। इसके अलावा सरकार की तरफ से पेश ड्राफ्ट में कहा गया है कि लोकपाल की चयन समिति में पांच सत्ताधारी पक्ष के होंगे और सात राजनीतिक नुमाइंदे होंगे। लोकपाल को हटाने का भी अधिकार सरकार के पास रहेगा। जबकि सीबीआई सरकार के नियंत्रण में रहेगी। प्रधानमंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच सीबीआई के पास रहेगी। सांसद भी लोकपाल के दायरे से बाहर रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जज लोकपाल के दायरे से बाहर रहेंगे। निचली अदालत भी लोकपाल के दायरे से बाहर रहेगी।’
केजरीवाल ने लोकपाल द्वारा की जाने वाली जांच और मुकदमे को लेकर भी सरकार की तरफ से पेश ड्राफ्ट की आलोचना की। उन्होंने कहा, ‘सरकार चाहती है कि लोकपाल किसी भी मामले में रिपोर्ट दर्ज करने से पहले आरोपी का पक्ष सुने। इसके अलावा मुकदमा दायर करने से पहले भी लोकपाल आरोपी का पक्ष एक बार फिर सुने।’
केजरीवाल ने कहा कि अगर सरकार की तरफ से पेश ड्राफ्ट को पास किया जाता है तो लोकपाल के पास जल्द ही इतना काम आ जाएगा कि यह संस्था काम के बोझ से दब जाएगी।केजरीवाल ने कहा कि हम चाहते हैं कि केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त को एक ही कानून के तहत नियुक्त किया जाए। लेकिन सरकार चाहती है कि मौजूदा सिस्टम के ही तहत लोकायुक्त काम करें।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ड्राफ्टिंग कमिटी में होने वाली बातचीत का ऑडियो टेप मांगने पर ड्राफ्टिंग कमिटी में शामिल केंद्र के मंत्रियों ने इस मांग पर विचार करने को कहा है।
दूसरी तरफ, केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने बैठक खत्म होने के बाद कहा कि सिविल सोसाइटी और सरकार की तरफ से पेश ड्राफ्ट राजनीतिक दलों को भेजे जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘पार्टियों की तरफ से जो भी सुझाव आएगा, उसे कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। जिस भी ड्राफ्ट या दोनों ड्राफ्टों में जिन भी बिंदुओं पर सहमति बनेगी उसे संसद के मॉनसून सत्र में रखा जाएगा।’
लोकपाल बिल की ड्राफ्टिंग कमिटी में शामिल केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने मंगलवार की शाम सिविल सोसाइटी की तरफ से पेश जनलोकपाल बिल के मसौदे की कड़ी आलोचना की। सिब्बल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हम चाहते हैं कि एक मजबूत लोकपाल बने, जिसके पास जांच और सज़ा देने का अधिकार होगा। सिब्बल ने कहा कि हम चाहते हैं कि इससे देश के संविधान की मूल भावना को ठेस न लगे। सिब्बल ने पूछा कि हम सरकार से बाहर किसी सरकार को देश चलाने की इजाजत कैसे दे सकते हैं?
कपिल सिब्बल ने कहा, ‘जन लोकपाल के मसौदे के मुताबिक लोकपाल को जीडीपी का एक फीसदी से कम होगा। यह खर्चा भी लोकपाल तय करेगा। शासन का निर्णय लोकपाल को पसंद नहीं आया तो उस पर लोकपाल अपनी आपत्ति जाहिर कर सकता है। क्या सरकार से बाहर कोई जांच एजेंसी काम कर सकती है? जन लोकपाल बिल के मसौदे के तहत लोकपाल किसी को जवाबदेह नहीं है। क्या देश ऐसे लोकपाल को स्वीकार करेगा, जिससे कोई सवाल न पूछ सके? कोर्ट भी लोकपाल के तहत होगा। ऐसे कोर्ट लोकपाल की जांच कैसे करेंगे?'
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