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Monday, 1 August 2011

अन्‍ना ने पीएम की ईमानदारी पर उठाए सवाल, सिब्‍बल को बताया ‘झूठा’!


 संसद के मानसून सत्र में जहां विपक्ष मंहगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रही है वहीं भ्रष्टाचार के खात्मे के लिये मुहिम चला रहे गांधीवादी समाजसेवी अन्ना हजारे और उनकी टीम ने सरकार पर हमला तेज कर दिया है। टीम अन्‍ना ने कहा है कि लोकपाल विधेयक को लेकर सरकार की नीयत साफ नहीं है और सरकार लोकपाल को लेकर अहम मुद्दों पर मुकर गई है।

अन्‍ना हजारे ने पीएम मनमोहन सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रस्‍तावित लोकपाल के दायरे से पीएम का पद बाहर रखने जाने के लिए दी जाने वाली उनकी ‘सफाई’ दुर्भाग्‍यजनक है। उन्‍होंने इस बात पर भी हैरानी जताई कि क्‍या अब तक ‘ईमानदार’  पीएम ‘झूठ’ बोल रहे थे।’ पीएम ने रविवार को कहा था कि वह जिस पद पर हैं, उसे लोकपाल के दायरे में लाना सही नहीं है। हालांकि, इससे पहले उन्‍होंने कहा था कि वह निजी तौर पर इस पद को लोकपाल के दायरे में लाए जाने के खिलाफ नहीं हैं।  

अन्ना ने आज यहां खचाखच भरे प्रेस कांफ्रेंस में ऐलान किया कि अगर 16 अगस्त से उन्हें जंतर मंतर पर अनशन नहीं करने दिया गया तो वह जेल में अनशन करेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें अनशन करने के लिये सरकार ने मजबूर किया है और इसके लिए सरकार जिम्मेदार है। उन्होंने बताया कि जंतर-मंतर पर अनशन की अनुमति के लिये उन्होंने दिल्ली पुलिस को जो पत्र लिखा था उसका उन्हें अभी तक जवाब नहीं मिला है।

मजबूत जन लोकपाल बिल के लिए आमरण अनशन पर अटल अन्‍ना हजारे ने केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्‍बल को ‘झूठा’ करार देते हुए कहा है कि सरकार ने सिविल सोसायटी के ड्राफ्ट की अनदेखी की है। सिब्‍बल के लोकसभा क्षेत्र चांदनी चौक में जनलोकपाल को लेकर कराए गए जनमत सर्वे के रिजल्‍ट घोषित करते हुए अन्‍ना ने कहा कि देश में सही मायने में लोकतंत्र लाना है तो यही रास्‍ता है। उन्‍होंने कहा कि सरकार का ऑडिट करने के साथ सामाजिक लेखा-जोखा (जनता क्‍या कह रही है) भी जरूरी है।

सामाजिक कार्यकर्ता ने लोकपाल बिल पर कहा कि भ्रष्‍टाचार के खिलाफ लड़ाई को लेकर सरकार की नीयत साफ नहीं है। उन्‍होंने कहा, 'संयुक्‍त समिति की 2 महीने की बैठक का नतीजा सिफर रहा। सरकार के प्रतिनिधि कपिल सिब्‍बल ने कहा था कि दोनों ड्राफ्ट को कैबिनेट के सामने रखा जाएगा लेकिन अंत में अपना ही ड्राफ्ट रखा।' 16 अगस्‍त से अनशन की बात दोहराते हुए अन्‍ना ने कहा कि अभी तक पुलिस ने हमारे खत का लिखित जवाब नहीं दिया है। उन्‍होंने कहा, ‘16 अगस्‍त को अनशन जरूर होगा। हम इसके लिए जेल जाने, लाठी खाने और गोली खाने के लिए तैयार हैं।'

हालांकि अन्‍ना ने साफ किया कि यदि जंतर-मंतर पर अनशन के लिए जगह नहीं मिलती है तो कहीं भी बैठने के लिए तैयार हैं। उन्‍होंने कहा, ‘150 लोग अनशन के लिए आने वाले हैं, यदि सरकार जंतर-मंतर पर इजाजत नहीं देगी तो हम कहीं भी अनशन पर बैठने के लिए तैयार हैं।‘

टीम अन्‍ना ने आज प्रेस कांफ्रेंस कर चांदनी चौक इलाके में कराए गए जनमत सर्वे के नतीजे घोषित किए। टीम अन्‍ना के सदस्‍य अरविंद केजरीवाल ने इन नतीजों की घोषणा करते हुए दावा किया कि 85 फीसदी लोग जनलोकपाल के पक्ष में हैं जबकि बहुमत पीएम को लोकपाल के दायरे में लाने के पक्ष में है। अन्‍ना ने सरकार को चुनौती दी है कि यदि सरकार को लगता है कि जनमत सर्वे में गड़बड़ी है तो वह सार्वजनिक बहस के लिए तैयार हैं।

प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद टीम अन्‍ना की सदस्‍य और पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने प्रभावी लोकपाल और प्रभावी लोकायुक्‍त की जरूरत पर बल दिया। उन्‍होंने कहा कि सरकार का ड्राफ्ट मंजूर करने लायक नहीं है। बेदी ने आरोप लगाया कि सरकार के मसौदे से साफ है कि वो भ्रष्‍टाचार से लड़ने के लिए गंभीर नहीं है।

अन्‍ना पर पलटवार
कांग्रेस ने अन्‍ना हजारे पर पलटवार करते हुए कहा कि यदि उन्हें और उनके सहयोगियों को अपने सर्वे पर इतना ही भरोसा है तो वह चांदनी चौक से चुनाव लड़ कर देख लें।
कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने आज प्रेस कांफ्रेंस में कहा, ‘हमने अन्‍ना हजारे और उनके सहयोगियों के सर्वे के बारे में सुना है। उन्हें इस पर इतना ही भरोसा है तो वह 2014 में चांदनी चौक से चुनाव लड़ कर देख लें, दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

हजारे के साथियों का दावा है कि सर्वे में लोगों ने प्रधानमंत्री और न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे में रखने का समर्थन किया है। तिवारी ने कहा कि सर्वे कराने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है लेकिन किसी को भी संविधान के ढांचे से खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

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