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Saturday, 20 August 2011

शहीद की मां की निकली आह, अब तक तुम कहां थे अन्ना

अन्ना अब तक तुम कहां थे.. शहीद की विधवा व बेटे को भी कारगिल युद्ध में खो चुकी परवीन खान के रुंधे गले से निकली यह आवाज भले ही वंदे मातरम् व इंकलाब जिंदाबाद के नारे के चलते अन्ना हजारे तक न पहुंची हो, लेकिन पिछले तीन दशक से भ्रष्टाचार की मार झेल रही इस विधवा के दिल में रह-रहकर उठ रही टीस अन्ना की एक झलक पाने के बाद थोड़ी शांत जरूर हुई होगी।

दरअसल, परवीन अपने पति को 1971 व बेटे को कारगिल की लड़ाई में खो चुकी हैं, लेकिन वह भी अपने घर के एकमात्र चिराग फरदीन के साथ अन्ना की मुहिम को समर्थन देने के लिए मायापुरी चौक पर पहुंची थीं।

देश के लिए अपने परिजनों की कुर्बानी दे चुकी इस महिला को भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों के चलते क्या-क्या दिन नहीं देखने पड़े, यह बताने से पहले ही उनका दिल भर आता है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों के दिल में बेचैनी किस कदर बढ़ चुकी है, इसकी एक बानगी शुक्रवार को अन्ना की रैली में साफ देखने को मिला। वहीं, कुछ लोगों ने तिहाड़ जेल से लेकर मायापुरी चौक तक
मानव श्रृंखला बनाकर समर्थन जताया।

रैली में भले हीं सर्वाधिक भागीदारी युवाओं की रही हो, लेकिन इस जन समूह में बच्चों से लेकर बुजुर्गो तक का उत्साह देखने के काबिल था।

इस दौरान मायापुरी फ्लाइओवर पर मार्बल एसोसिएशन की तरफ से लगाए गए बैनर में तो एक दो वर्तमान केंद्रीय मंत्रियों के नाम के साथ उन तक पहुंचने वाली अवैध राशि का उल्लेख भी किया गया था।

भ्रष्टाचार की पोल खोलने वाले ऐसे न जाने कितने ही बैनरों से पूरे रास्ते को पाट दिया गया था। इन सभी को आशा थी कि अन्ना की पहल से भ्रष्टाचार रूपी समाज के कोढ़ की सफाई में इन बीमारियों का भी इलाज हो जाएगा।

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