अन्ना हजारे के अनशन स्थल को लेकर भले ही अब तक असमंजस बरकरार है, लेकिन इसका असर अन्ना समर्थकों पर कतई नहीं पड़ रहा है। उनका सीधे तौर पर कहना है कि जहां अन्ना होंगे, उनके समर्थन में हम वहीं पहुंच जाएंगे।
भारी संख्या में समर्थक इस बार 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस के जश्न के लिए नहीं बल्कि 16 अगस्त की तैयारी में जुट गए हैं। हालांकि कुछ समर्थकों का यह भी कहना है कि कोटला में आधारभूत व्यवस्था का अभाव और मेट्रो न होने की वजह से समर्थकों को जंतर-मंतर की तुलना में यहां आने में दिक्कत का सामना आ सकता है लेकिन यह उनके लिए चुनौती होगी और वे भारी संख्या जुटेंगे।
युवा समर्थक मानस मिश्रा ने कहा कि जगह परिवर्तन से विचार परिवर्तन नहीं हो जाता। वह कहते हैं कि अब असली परिवर्तन का समय आया है और इसमें हम बढ़-चढ़ कर देंगे। इसी प्रकार समर्थक आनंद का कहना है कि इस बार हम आजादी 15 अगस्त को नहीं, 16 अगस्त को मनाएंगे।
हमारे लिए अब असली आजादी की लड़ाई भ्रष्टाचार के खिलाफ ही है। सतेंद्र कहते हैं कि अनशन कहीं भी हो, अनशन के लिए तो पूरी पृथ्वी है। अन्ना जहां होंगे उनका साथ देने के लिए हम जान लेकर हाजिर हो जाएंगे। हालांकि पीएन सिंह की कुछ अलग सोच है। वह कहते हैं कि कोटला तक पहुंचने के लिए न तो मेट्रो सेवा है न ही बस सुविधा।
यही नहीं, यहां न कोई दुकान है और न ही खराब मौसम में बचने की व्यवस्था। खैर इन सबके बावजूद अन्ना के समर्थन के लिए हम पूरी शिद्दत से यहां पहुंचेंगे। वहीं जितेंद्र सिंह ने कहा कि सौभाग्यवश इस पार्क का नाम जयप्रकाश के नाम से है, जिन्होंने इमरजेंसी के समय देश के लिए बड़ी लड़ाई लड़ी थी।
भारी संख्या में समर्थक इस बार 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस के जश्न के लिए नहीं बल्कि 16 अगस्त की तैयारी में जुट गए हैं। हालांकि कुछ समर्थकों का यह भी कहना है कि कोटला में आधारभूत व्यवस्था का अभाव और मेट्रो न होने की वजह से समर्थकों को जंतर-मंतर की तुलना में यहां आने में दिक्कत का सामना आ सकता है लेकिन यह उनके लिए चुनौती होगी और वे भारी संख्या जुटेंगे।
युवा समर्थक मानस मिश्रा ने कहा कि जगह परिवर्तन से विचार परिवर्तन नहीं हो जाता। वह कहते हैं कि अब असली परिवर्तन का समय आया है और इसमें हम बढ़-चढ़ कर देंगे। इसी प्रकार समर्थक आनंद का कहना है कि इस बार हम आजादी 15 अगस्त को नहीं, 16 अगस्त को मनाएंगे।
हमारे लिए अब असली आजादी की लड़ाई भ्रष्टाचार के खिलाफ ही है। सतेंद्र कहते हैं कि अनशन कहीं भी हो, अनशन के लिए तो पूरी पृथ्वी है। अन्ना जहां होंगे उनका साथ देने के लिए हम जान लेकर हाजिर हो जाएंगे। हालांकि पीएन सिंह की कुछ अलग सोच है। वह कहते हैं कि कोटला तक पहुंचने के लिए न तो मेट्रो सेवा है न ही बस सुविधा।
यही नहीं, यहां न कोई दुकान है और न ही खराब मौसम में बचने की व्यवस्था। खैर इन सबके बावजूद अन्ना के समर्थन के लिए हम पूरी शिद्दत से यहां पहुंचेंगे। वहीं जितेंद्र सिंह ने कहा कि सौभाग्यवश इस पार्क का नाम जयप्रकाश के नाम से है, जिन्होंने इमरजेंसी के समय देश के लिए बड़ी लड़ाई लड़ी थी।
0 comments: on "अन्ना जाएंगे जहां, हम मिलेंगे वहां"
Post a Comment