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Monday, 27 June 2011

लोकपाल पर बवाल: अन्‍ना से निपटने के लिए माथापच्‍ची करेंगे कांग्रेस के दिग्‍गज

नई दिल्‍ली. बाबा रामदेव से निपटने के बाद अब कांग्रेस और सरकार में अन्‍ना हजारे से निपटने की तैयारी तेज हो गई लगती है। शुक्रवार को कांग्रेस कोर ग्रुप की बैठक हो रही है। इसमें इस पर रणनीति तय की जाएगी कि लोकपाल के दायरे में प्रधानमंत्री को शामिल किए जाने की मांग पर अड़े सिविल सोसाइटी के लोगों से कैसे निपटा जाए। खास कर, तब जब अन्‍ना हजारे ने कमजोर लोकपाल बिल लाने की स्थिति में 16 अगस्‍त से दोबारा अनशन करने की धमकी दी है।
अन्‍ना की अगुवाई में चली लोकपाल बिल लागू करवाने की मुहिम में सरकार ने अब तक बिल से जुड़ी सिविल सोसाइटी की एक  भी बात नहीं मानी है। बिल का ड्राफ्ट बनाने के लिए गठित साझा समिति की बैठक की कार्रवाई जनता को दिखाने की मांग हो या फिर लोकपाल के दायरे में प्रधानमंत्री और न्‍यायपालिका को रखने की मांग। सरकार इस पर सहमत नहीं हुई और कह दिया कि हम किसी को समानांतर सरकार नहीं चलाने देंगे।
सरकार बिल को मानसून सत्र में संसद में रखना चाह रही है और इससे पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने पर भी विचार कर रही है।
अन्‍ना हजारे ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार खोखले वादे कर रही है। उन्‍होंने बाबा रामदेव के अनशन  का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह बाबा रामदेव के साथ हुआ वैसा हमारे साथ भी हो सकता है।
उन्‍होंने गुरुवार को यहां अपनी टीम के साथ प्रेस कांफ्रेंस में सरकार पर 'यू-टर्न' लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि शुरू में सरकार ने हमारी सभी मांगें मान ली थी लेकिन अब वह अपने वादे से मुकर रही है। उन्‍होंने कहा, 'लोकपाल बिल तैयार करने की प्रक्रिया में राजनीति हावी हो गई है। लेकिन हम भ्रष्टाचार के खिलाफ आखिरी सांस तक लड़ेंगे। मजबूत लोकपाल बिल के लिए हम फिर से जंतर-मंतर पर अनशन करेंगे। इस दौरान यदि हमारी जान भी चली गई तो हमें कोई परवाह नहीं।' अन्‍ना ने सवालिया लहजे में कहा, 'सरकार लोकपाल बिल के लिए खुद का ड्राफ्ट कैसे तैयार कर सकती है।' 
इस दौरान प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मसौदा समिति की मीटिंग की ऑडियो रिकॉर्डिंग को सार्वजनिक करने को लेकर सरकार टालमटोल कर रही है। सरकार सार्वजनिक रूप से वाद-विवाद के लिए भी तैयार नहीं है। पीएम और न्‍यायपालिका को लोकपाल के दायरे में लाने के मुद्दे पर सरकार आनाकानी कर रही है। पिछले दो महीने में सरकार ने हमारे साथ जो बैठक की है वो जनता को गुमराह करने की कोशिश थी। यह लोकपाल नहीं 'जोकपाल' बिल की तैयारी है।
सिविल सोसायटी के अन्‍य सदस्‍यों में शामिल प्रशांत भूषण ने कहा कि असली मुद्दे पर बेहद कम चर्चा हो सकी। मीटिंग में कुछ मुद्दों पर अहम बहस हुई तो यह निकल कर सामने आया कि सरकार का जो लोकपाल बिल का मॉडल है वह सिविल सोसायटी से बिल्‍कुल अलग है।
इस बीच, पीएम और न्‍यायपालिका को लोकपाल के दायरे में रखे जाने पर सिविल सोसायटी और सरकार के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। अन्‍ना हजारे ने आज कहा है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो उन्‍हें दोबारा अनशन करना पड़ेगा। इस पर दिग्विजय सिंह ने उन्‍हें संविधान का आदर करने की नसीहत दी है।
अन्‍ना हजारे ने कहा कि वो सरकार के रवैये से बेहद निराश हैं। उन्‍होंने कहा, 'यदि हमें लगता है कि लोकपाल बिल कमजोर पड़ रहा है तो हम फिर से उपवास करेंगे।' अन्‍ना ने कहा, 'ऐसा लगता है कि सरकार एक मजबूत लोकपाल बिल लाने के पक्ष में नहीं है। यदि दो ड्राफ्ट बनाने हैं तो इसके लिए एक ज्‍वाइंट कमेटी की क्‍या जरूरत है?' अन्‍ना का यह बयान ज्‍वाइंट कमेटी की उस बैठक के एक दिन बाद आया जिसमें लोकपाल बिल को लेकर दोनों पक्षों के बीच बातचीत बेनतीजा रही।
अनशन ने नहीं होगा कुछ हासिल: शरद
जनता दल (यू) के अध्‍यक्ष शरद यादव ने भोपाल में कहा कि वह विरोध प्रदर्शन के लिए अनशन को हथियार बनाने के खिलाफ हैं क्‍योंकि इससे मूल मुद्दा भटक जाता है। पत्रकारों से बातचीत में यादव ने कहा कि वह जय प्रकाश नारायण और राम मनोहर लोहिया जैसे नेताओं के इन विचारों से इत्‍तेफाक रखते हैं कि उपवास से कोई मकसद पूरा नहीं होता बल्कि इससे सिर्फ अनशन पर बैठने वाला व्‍यक्ति सुर्खियों में आता है।
जद(यू) नेता ने हालांकि भ्रष्‍टाचार के खिलाफ हजारे और रामदेव के अनशन पर कोई टिप्‍पणी नहीं की लेकिन इतना जरूर कहा कि जहां भी अनशन होता है, लोग असल मुद्दे को भूलकर अनशन पर बैठने वाले व्‍यक्ति के स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर बातें करते हैं।
पीएम से मिले दिग्विजय, सिब्‍बलगुरुवार को कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह और कपिल सिब्‍बल ने भी प्रधानमंत्री से मुलाकात की। मुलाकात करीब 45 मिनट चली। दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर अन्‍ना और उनकी टीम को निशाने पर लिया। अन्‍ना के फिर अनशन करने की चेतावनी पर दिग्विजय ने कहा है कि अन्‍ना और उनके साथियों को सरकार के बारे में गलत राय नहीं बनानी चाहिए। इससे पहले कांगेस नेता ने अन्‍ना को उम्र का खयाल रखने की नसीहत दी थी।
  
उन्‍होंने कहा कि अन्‍ना और उनके साथियों को यह बात समझनी चाहिए कि संसद और संविधान भी कोई चीज है। सरकार सिविल सोसायटी के खिलाफ नहीं, बल्कि संविधान के दायरे में रहकर काम करती है।
जन लोकपाल बिल की मांग को लेकर अन्‍ना हजारे ने बीते अप्रैल में दिल्‍ली के जंतर-मंतर पर करीब 90 घंटे का अनशन किया था। लोकपाल बिल को लेकर अन्‍ना की मांग को देशव्‍यापी समर्थन मिलने के बाद सरकार इस बिल का मसौदा तैयार करने पर राजी हुई लेकिन उसके बाद अब तक सरकार और सिविल सोसायटी के बीच किसी न किसी मुद्दे पर टकराव होता रहा है। ज्‍वाइंट कमेटी की अगली बैठक 20 जून को होगी। इसमें सहमति नहीं बनी तो बिल के ड्राफ्ट के बजाय दो कैबिनेट नोट बनेंगे। इसमें सरकार और सिविल सोसायटी के वर्जन होंगे

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