Support Anna, Support India.
Featured Posts

Monday, 29 August 2011

जनता फिर अन्‍ना के साथ, पर सरकार ने खारिज किया 'राइट टू रिकॉल' का विचार

अन्‍ना हजारे की दूसरी लड़ाई में जनता ने अभी से उनके साथ होने का संकेत दे दिया है, लेकिन सरकार और कांग्रेस ने एक तरह से अन्‍ना की मांग खारिज कर दी है।  दैनिकभास्‍कर.कॉम पर एक पोल में 98 फीसदी पाठकों ने राइट टू रिकॉल का समर्थन किया है, लेकिन कांग्रेस और सरकार ने इसे लागू करने में दिक्‍कत का बयान किया है।



कांग्रेस ने कहा है कि सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को वापस बुलाने एवं उम्मीदवारों को ठुकराने का अधिकार देने की मांग अव्यावहारिक है। उसकी दलील है कि देश में 50 प्रतिशत से ज्यादा मतदाता मताधिकार का इस्तेमाल ही नहीं करते। भाजपा ने कहा कि इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
कांग्रेस के प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा, ‘13-14 करोड़ मतदाताओं में से सिर्फ तीन करोड़ वोट हासिल कर उम्मीदवार जीत हासिल करते हैं.. मुझे नहीं लगता कि राइट टू रिकॉल हमारे देश में संभव है।’ उन्होंने कहा, ‘राइट टू रिजेक्ट का महत्व तब बढ़ेगा जब अधिकांश वोटर मताधिकार का इस्तेमाल करें। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि 80-90 प्रतिशत वोटर मतदान बूथ तक पहुंचें। अन्यथा यह अधिकार अव्यावहारिक ही रहेगा।’
कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने भी 'राइट टू रिकॉल' के विचार पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्‍या यह संभव है कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति या ब्रिटिश सांसद को जनता वापस बुला सकती है? उन्‍होंने कहा कि विशाल और सशक्‍त लोकतंत्र में यह प्रयोग सफल नहीं हो सकता।

चुनाव सुधारों का समर्थन करते हुए भाजपा नेता राजनाथ सिंह ने कहा, हम चुनाव व्यवस्था में बदलाव के साथ है। जेपी आंदोलन की याद करते हुए सिंह ने कहा, जेपी ने जब देश में संपूर्ण क्रांति का आह्वान किया, राइट टू रिकॉल और राइट टू रिजेक्ट के मुद्दे उस समय भी उठे थे। इन्हें गंभीरता से लिए जाने की आवश्यकता है।

राइट टू रिजेक्ट
मतपत्र में उम्मीदवारों के साथ ही ‘कोई पसंद नहीं’ या ‘इनमें से कोई नहीं’ विकल्प भी रहेगा। यह बटन दबा कर मतदाता चुनाव में खड़े उम्मीदवारों को नकार सकता है। एक निश्चित संख्या से ज्यादा ऐसे वोट पड़ने पर फिर से चुनाव करवाने की व्यवस्था होगी।
राइट टू रिकॉल
मतदाताओं को यह अधिकार मिलना कि वह अपने निर्वाचित जनप्रतिनिधि को वापस बुला सके। यदि कोई सांसद, विधायक या अन्य जन प्रतिनिधि जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा हो तो उसे इस अधिकार के जरिये हटाया जा सकेगा।

अन्‍ना हजारे ने कहा है कि अब उनकी लड़ाई चुनाव सुधार के लिए होगी और इसके तहत वह जनता को उन सांसदों को वापस बुलाने का अधिकार दिलाएंगे जो काम नहीं करते हैं।

Digg Google Bookmarks reddit Mixx StumbleUpon Technorati Yahoo! Buzz DesignFloat Delicious BlinkList Furl

0 comments: on "जनता फिर अन्‍ना के साथ, पर सरकार ने खारिज किया 'राइट टू रिकॉल' का विचार"

Post a Comment