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Tuesday, 16 August 2011

मनीष सिसौदिया जेल से बाहर आए,धरने पर बैठे

अन्ना हजारे की रिहाई के आदेश भले ही दिल्ली पुलिस की ओर से दे दिए गए हों लेकिन उन्होंने जयप्रकाश नारायण राष्ट्रीय उद्यान में अनशन करने की अनुमति न मिलने तक तिहाड़ जेल न छोड़ने का फैसला किया है।
अन्ना के बाहर ना आने की हठ को देखते हुए तिहाड़ जेल के प्रशासनिक ब्लाक के एक कमरे में अन्ना को आराम करने के लिए रूम दिया गया है।
अन्ना हजारे के करीबी सहयोगी मनीष सिसौदिया ने तिहाड़ जेल के बाहर उमड़ी भीड़ को सम्बोधित करते हुए कहा, "अन्ना हजारे ने तब तक तिहाड़ जेल से बाहर आने से मना कर दिया है जब तक कि उन्हें जयप्रकाश नारायण राष्ट्रीय उद्यान में अनशन की अनुमति नहीं दे दी जाती।"

उन्होंने कहा,"अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल का अनशन जेल के भीतर जारी है। मैं इसलिए बाहर आ गया हूं ताकि लोगों को इस सम्बंध में जानकारी दी जा सके।"
इससे पहले, दिल्ली पुलिस ने अन्ना हजारे और उनके सहयोगियों की रिहाई का वारंट भेजा था। दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजन भगत ने  बताया, "हमने अन्ना हजारे व उनके सहयोगियों की रिहाई का वारंट भेज दिया है।" भगत ने कहा कि अब यह तिहाड़ जेल प्रशासन को फैसला करना है कि वह अन्ना हजारे को कब रिहा करेंगे।

इधर किरण बेदी ने कहा है कि अन्ना ने रिहाई के लिए कोई शर्त नहीं रखी है। अन्ना को बिना शर्त छोड़ा जा रहा है। अन्ना की रिहाई पर प्रशांत भूषण ने प्रतिक्रिया देते हुए  कहा कि देर आए दुरुस्त आए।
इस बीच तिहाड़ जेल के बाहर अन्ना के समर्थकों की भारी  भीड़ जमा  है।
गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे को दिल्ली पुलिस ने दंड प्रक्रिया संहिता की दो धाराओं- धारा 107 और 151 के तहत गिरफ्तार किया गया।
धारा 107 के तहत किसी भी क्षेत्र में शांति तथा सौहार्द का उल्लंघन करने पर गिरफ्तारी का प्रावधान है।

इसके अनुसार,कार्यकारी मजिस्ट्रेट को यदि सूचना मिलती है कि कोई व्यक्ति शांति भंग या सार्वजनिक सौहार्द को बाधित करने वाला है,उसके किसी कदम से शांति या सौहार्द को नुकसान पहुंचता है या यदि मजिस्ट्रेट को कानूनी प्रक्रिया के पर्याप्त आधार नजर आते हैं तो वह ऐसे व्यक्ति से एक निश्चित अवधि के दौरान शांति बनाए रखने का आश्वासन ले सकते हैं। अवधि का निर्धारण मजिस्ट्रेट के विवेक पर निर्भर होगा। यह एक साल से अधिक नहीं हो सकती।

वहीं,धारा 151 के तहत  संज्ञेय अपराधों की रोकथाम के लिए किसी भी आशंकित व्यक्ति को गिरफ्तार किया जा सकता है। इसके अनुसार,यदि पुलिस को किसी  संज्ञेय अपराध के बारे में जानकारी मिलती है और उसे लगता है कि सम्बंधित व्यक्ति को गिरफ्तार किए बिना इसे रोकना मुश्किल है तो वह मजिस्ट्रेट के आदेश या वारंट के बगैर भी उसे गिरफ्तार कर सकती है।

ज्ञात हो कि अन्ना हजारे को मंगलवार सुबह उस समय हिरासत में ले लिया गया था, जब वह भ्रष्टाचार निरोधी जनलोकपाल विधेयक के समर्थन में अपना प्रस्तावित आमरण अनशन शुरू करने के लिए घर से निकले थे।
दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजन भगत ने कहा, "अन्ना हजारे ने निजी मुचलके पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया, लिहाजा उन्हें सात दिनों की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया है।"
अन्ना हजारे को जेल के जिस ब्लॉक में रखा गया है, उसी अहाते में राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति के पूर्व अध्यक्ष सुरेश कलमाडी को भी रखा गया है। अन्ना हजारे के प्रमुख सहयोगी अरविंद केजरीवाल और 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के आरोपी पूर्व दूरसंचार मंत्री ए.राजा के एक अहाते में रखा गया है।
तिहाड़ जेल के महानिदेशक नीरज कुमार के अनुसार अन्ना हजारे को दोपहर बाद लगभग 3.40 बजे यहां लाया गया और उन्हें जेल संख्या चार में रखा गया।
अन्ना हजारे के निकट सहयोगी मनीष सिसोदिया एवं अन्य तीन जेल के इसी ब्लॉक में रखे गए हैं।
कुमार ने कहा, "अरविंद केजरीवाल जेल संख्या एक में अन्य चार समर्थकों के साथ हैं।"
उन्होंने हालांकि स्पष्ट किया कि अन्ना हजारे को उसी ब्लॉक में रखा गया है जिसमें कलमाडी हैं लेकिन उनके निकटवर्ती वार्ड में नहीं रखा गया है।
कुमार ने संवाददाताओं से कहा, "अन्ना हजारे जिस वार्ड में हैं, वह कलमाडी के वार्ड से दूर है। हमने पहले ही उनकी चिकित्सीय जांच कराई है।"
उप महानिरीक्षक (करागार) आर.एन. शर्मा ने आईएएनएस से कहा, "अन्ना हजारे अनशन कर रहे हैं। उन्होंने पानी तक लेने से इंकार कर दिया।"
शर्मा ने यह भी कहा कि दोनों जेलों (जेल संख्या एक और चार) में 2,000 से अधिक कैदी हैं।

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